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छतरपुर शिक्षा विभाग में मचा बवाल! RTI पर उठे सवाल, नए DEO की कार्यशैली पर क्यों हो रही चर्चा?

 कुर्सी पाते हैं भ्रस्टाचार के सुर में बोलने लगे प्रकाश कुमार रैकवार..


आरटीआई आवेदनों पर कुंडली मार बैठने का इरादा...

कुर्सी पर बैठते ही शिक्षा माफियाओं के साथ जमेगी जुगलबंदी..

आरटीआई आवेदनों को बनाया मज़ाक, सूचना अधिकार अधिनियम मनमर्जी परिभाषित करने की तैयारी...




बकस्वाहा। कुछ ही दिनों पहले जिला शिक्षा अधिकारी बने प्रकाश कुमार रैकवार ने शिक्षा विभाग के जिला प्रमुख की कुर्सी पर वाइल्ड कार्ड एंट्री मारते हुए पूरे जिले को चौंका दिया था. बीते सालों से ही जिले की यह कुर्सी राजनीतिक अखाड़ा बनी हुई है भ्रस्टाचार के तमाम आरोप प्रत्यारोप होते रहे. DPC अरुण शंकर पांडे के पद संभालते ही शिक्षा जगत के काले कारोबार में डूबते हुए सितारे फिर से जगमगा उठे. अरुण शंकर पाण्डेय के बाद सहायक संचालक धनश्री जैन तबादले से आने की चर्चाओं से शिक्षा के काले कारोबार से जुड़े कारोबारियों के हौसले पर लगाम लगाई. इसी बीच प्रकाश कुमार रैकवार जिला मठाधीश की कुर्सी पर पदासीन हुए. आरोप है कि उनके पदासीन होते ही भ्रस्टाचार की मुरझा रही शाखाओं को जैसे नए जीवन का सिंचन हो गया मानो कि अब नयी उम्मीद जगी हो. कथित आरोप है कि बीते दिनों ही शिक्षा विभाग में तथा कथित सक्रिय माफियाओं ने जिला मठाधीश से मुलाकात कर पुराने कारनामों पर पर्दा डालने का आर्शीवाद मांगा, बिना किसी हिचकिचाहट के जिलाधिकारी ने यथासंभव सहायता करने का वचन भी दे डाला.


बीते दिनों जब 3 माह पुराने आरटीआई आवेदन के विषय में चर्चा करने के लिए आवेदक ने DEO प्रकाश रैकवार से संपर्क किया तो वरिष्ठ और बुद्धिजीवी प्रकाश कुमार आरटीआई अधिनियम की नयी परिभाषाएँ गणने लगे. अधिनियम को अपने उपयोग के अनुसार ही manipulate करने की कवायद में बात करते नज़र आए. उनकी बात करने की शैली और भ्रस्टाचार शिकायत के प्रति संवेदनशीलता भरी बातें सुनकर ऐसा लगता मानों कि महोदय बागेश्वर धाम जैसे ही भूत और भविष्य जानते हों, बातों ही बातों में कहते हैं कि RTI आवेदन में थर्ड पार्टी जानकारी नहीं मांग सकते हैं. 

सूत्रों की माने तो पुराने जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित को जानकारी देने को कहा था लेकिन प्रकाश कुमार के सीट पर बैठते ही क्या RTI अधिनियम बदल गया या नियत. 

हालंकि कि कुछ भी हो अधिकारी और कर्मचारियों की भ्रस्टाचार छुपाने की जुगलबंदी फिर नए मुकाम हासिल करेगी.

सूत्र बताते हैं कि प्रकाश रैकवार माफियाओं को अंधा सपोर्ट करने के लिए नियमों को ताक पर रहने से भी नहीं कतराते हैं. यही नहीं अतिथि शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े से मोटा रुपया बनाने के लिए दलाल और माफिया सक्रिय हो गए हैं. 

अब देखने बाली बात यह है कि इतने के बाद भी क्या प्रकाश रैकवार अपनी कार्यशैली को बदलेंगे या नियम - कानून को अपने हाथों की कृति मानकर उपयोगिता अनुसार परिभाषित करेंगे.

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