न्याय की आस में दो साल से भटक रहे अभिभावक, शिक्षा मंत्री से लगाई गुहार
संबल योजना की राशि और विद्यालय शुल्क में अनियमितता के आरोप, आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर जांच की मांग
बक्सवाहा
बक्सवाहा। छतरपुर जिले के बक्सवाहा जनपद क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बम्होरी में संबल योजना की राशि और विद्यालय में वसूले जा रहे शुल्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि संबल कार्डधारी विद्यार्थियों को शासन की योजना का लाभ नहीं दिया गया, जबकि संबंधित राशि का रिकॉर्ड में प्रावधान होने के बावजूद विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को अब तक राशि प्राप्त नहीं हुई है।
मामले को लेकर ग्रामीण और अभिभावक पिछले करीब दो वर्षों से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने जिला और संभाग स्तर के अधिकारियों को शिकायतें देने के साथ-साथ आरटीआई के माध्यम से दस्तावेज भी प्राप्त किए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
संबल योजना के लाभ से वंचित होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बम्होरी में सत्र 2024-25 के दौरान संबल योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को शुल्क में मिलने वाले लाभ का भुगतान नहीं किया गया।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सत्र 2024-25 में—
- कक्षा 12वीं के 315 विद्यार्थियों के लिए लगभग ₹3,84,575
- कक्षा 10वीं के 278 विद्यार्थियों के लिए लगभग ₹3,38,100
- कक्षा 9वीं के 314 विद्यार्थियों के लिए लगभग ₹85,200
की राशि का प्रावधान था, लेकिन पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को इसका लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में संबल योजना की राशि के संपूर्ण रिकॉर्ड की जांच कराकर पात्र विद्यार्थियों को उनका लाभ दिलाने की मांग की है।
1500 से 2000 विद्यार्थियों से शुल्क वसूली का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में प्रत्येक वर्ष लगभग 1500 से 2000 विद्यार्थी अध्ययनरत रहते हैं। विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क, खेल शुल्क, परीक्षा शुल्क, स्काउट-गाइड और स्कूल विकास सहित विभिन्न मदों के नाम पर लगभग ₹2,400 से ₹2,800 तक शुल्क वसूले जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इतनी बड़ी राशि वसूले जाने के बावजूद विद्यार्थियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। साथ ही, विद्यालय के लेखा-जोखा में भी आय और व्यय को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
आरटीआई से रिकॉर्ड में अनियमितता का दावा
ग्रामीणों द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर आरोप लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विद्यालय के लेखा रिकॉर्ड में पूरे वर्ष के लेन-देन को केवल एक वाउचर के माध्यम से दर्शाया गया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विद्यालय में प्रतिवर्ष लाखों रुपये की राशि शुल्क के रूप में एकत्रित की जाती है, लेकिन लेखा पुस्तिका में उस आय का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इसको लेकर ग्रामीणों ने वित्तीय रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी लंबित है। इसलिए मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के आदेश के बावजूद जांच नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अपर कलेक्टर एवं प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी कौशल सिंह द्वारा मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी पवन राय और शासकीय हाई स्कूल गदोही के प्राचार्य अर्जुन सिंह बघेल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच दल को तीन दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बाद भी जांच नहीं होती है तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कमिश्नर को भी शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
मामले को लेकर ग्रामीणों ने सागर संभाग के कमिश्नर को भी शिकायत भेजी। शिकायत के साथ संबल योजना की राशि से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड भी संलग्न किए गए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद अब तक संबंधित प्रभारी प्राचार्य के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की है।
अब शिक्षा मंत्री से न्याय की उम्मीद
लगभग दो वर्षों से न्याय की मांग कर रहे अभिभावकों और ग्रामीणों ने अब मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि—
- संबल योजना की राशि का संपूर्ण रिकॉर्ड जांचा जाए।
- पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाया जाए।
- विद्यालय में वसूले गए शुल्क और पूरे वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट कराया जाए।
- जांच के आदेश के बावजूद जांच नहीं करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
- यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री को भेजी गई शिकायत के बाद शासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और दो वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे अभिभावकों को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है।


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