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लोक समीक्षा : उत्सव और सत्कार तक सीमित प्रतीत होता पथरिया का सरकारी कॉलेज:छात्रों की उपस्थिति में आ रही गिरावट

 

उत्सव और सत्कार तक सीमित प्रतीत होता पथरिया का सरकारी कॉलेज: छात्रों की उपस्थिति में आ रही गिरावट


सहायक प्राध्यापक मानते रहे आनंद:कंधे पर बैग लटकाए छात्र करते रहे क्लास का इंतजार



संवाददाता | नीरज ठाकुर 

पथरिया-पिछले दिनों पथरिया के सरकारी महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के द्वारा मकर संक्रांति के त्योहार पर 'पतंग उत्सव' का आयोजन किया गया,जिसमें जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष सहित पूर्व विधायक,भाजपा जिला महामंत्री तथा भाजपा मण्डल अध्यक्ष और नगर के गणमान्य व अन्य नागरिक उपस्थित रहे।


सहायक प्राध्यापक पतंग उड़ाकर मजे ले रहे , विद्यार्थी बैग टांग कर क्लास लगने का इंतजार करते रहे  ।


चूंकि आयोजन सरकारी कॉलेज के मैदान में आयोजित था तो कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य की उपस्थिति लाजमी थी,जिसका तात्पर्य था कि उस समय कॉलेज में समय सारणी अनुसार क्लास संचालित हुई कि नहीं यह देखने वाला कोई नहीं होगा,साथ ही, जो पढ़ाना ही नहीं चाहते उन्हे भी सुस्ताने का सुअवसर मिला होगा, और क्लास लेने के बजाए वे मैदान में पतंग उड़ाते और आनंद लेते हुए भी दिखाई दिए और छात्र किताबों से भरा बैग कंधो पर टांगे कभी पतंग तो कभी अपने शिक्षकों के आनंद को देखते रहे।


विद्यार्थियो की उपस्थिति  गिरावट - सहायक प्राध्यापक  को नहीं पड़ाने  में रुचि | 

वैसे एक जानकारी के अनुसार पिछले समयों से कॉलेज में अध्ययनरत छात्रों की उपस्थिति में गिरावट देखी गई है नाम न छापने की शर्त पर बताया गया कि क्लास नहीं लगती है सहायक प्राध्यापकों की पढ़ाने में रुचि नहीं रहती या उन्हें ही स्वयं के विषय की जानकारी नहीं है जिस कारण वे क्लास में जाने से हिचकिचाते महसूस होते हैं।


खाना पूर्ती के चक्कर में पढ़ाई ठप्प ।

 शायद अप डाउन करने वाले अधिकांश स्टाफ को पढ़ाने से ज्यादा खाना पूर्ति की फिक्र है इसलिए कुछ न कुछ कार्यक्रम, और मनोरंजन, फार्म भरने और परीक्षाओं के बहाने पढ़ाई कम परिलक्षित होने लगी है,

                 परंतु इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि शैक्षणिक गुणवत्ता में उत्थान हुआ कि गिरावट,बस स्थानीय तालमेल बना कर समय बीत जाए, भले ही कॉलेज की बाउंड्रीवॉल अब तक न बन पाई हो या सभागार का लाभ मिलने में देर हो रही हो,पर सवाल जवाब न हों इसलिए स्थानीय मेल जोल कर काम चल जाएं क्योंकि दूर दूर से आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी को तो तर्क देकर खामोश कर दिया जाएगा,पर स्थानीय नाराज न हो जाए इसलिए सत्कार का अभिनय किया जाए।

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